1 2 3 4
 

मिथिला'' प्राचीन भारत में एक राज्य था। माना जाता है कि यह वर्तमान उत्तरी बिहार और नेपाल की तराई का इलाका है जिसे मिथिला के नाम से जाना जाता था. मिथिला की लोकश्रुति कई सदियों से चली आ रही है जो अपनी बौद्धिक परंपरा के लिये भारत और भारत के बाहर जाना जाता रहा है। इस इलाके की प्रमुख भाषा मैथिली है। धार्मिक ग्रंथों में सबसे पहले इसका उल्लेख रामायण में मिलता है। मिथिला का उल्लेख महाभारत, रामायण, पुराण तथा जैन एवं बौद्ध ग्रन्थों में हुआ है।

गंगा-घाटी के नगरों के साथ मिथिला का व्यापारिक सम्बन्ध सदा से ही था। श्रावस्ती एवं काशी के व्यापारी यहाँ आते थे। वहाँ के नागरिक बनारसी सिल्क के बड़े ही शौक़ीन थे। जातक ग्रन्थों के अनुसार मिथिला-नरेशों के दरबारी काशी के सिल्क की धोती, पगड़ी और मिर्जई पहनते थे। मिथिला-नागरिक बड़े ही उत्साही थे। वहाँ के जिज्ञासु नवयुवक अध्ययन के लिये पहले तक्षशिला जाया करते थे, जो इस नगर से सैकड़ों मील की दूरी पर स्थित था। अतएव लगता है कि बहुत प्रारम्भ में मिथिला-पुरी शिक्षा-केन्द्र न थी। पर बाद में वहाँ बौद्धिक विकास बड़ी शीघ्रता के साथ आरंभ हुआ। बाह्य आक्रमणों से सुरक्षित होने के कारण इस नगर का वातावरण शान्तिमय था। फलत: वहाँ शिक्षा एवं उच्च संस्कृति की अभिवृद्धि संभव हुई। यह पुरी पंडितों की खान समझी जाने लगी। मिथिला-मण्डल के विद्वानों में मण्डनमिश्र उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने शंकराचार्य से टक्कर ली थी जयदेव एवं विद्यापति मिथिला की विभूति थे।