MithilaYatra Foundation


...an Initiative Towards the Cultural Upliftment of Mithilanchal

MithilaYatra Foundation
Vill-Satlakha (Garokhar)
Post- Hussainpur
Dist-madhubani
Pin-847238
Email: info@mithilayatra.com
Mob:9401838661

mithilayatra

मिथिलयात्रा फाउंडेशन के द्वारा २०१२ में मैथिलि साहित्य , संस्कृति व ऐतिहासिक धरोहर के संगरक्षण के तहत इस वेब लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है । हमारा उद्देश्य मिथिलांचल के गौरवशाली ऐतिहासिक परम्पराओ को जीवंत रखने का है ।

                               इस वेबसाइट का कंटेंट हिंदी में इसलिए बनाया गया है क्यूंकि मैथिलि के जानकर व न जानने वाले भी मिथिलांचल के बारे में आसानी से पढ़ सकें । हम जल्द ही इसका मैथिलि व english version उपलब्ध कराएँगे ।

 
Three Way To Support MithilaYatra
1
If you are interested person then start writing for us. Choose any column for which you want to write. Write a article send it to info@mithilayatra.com. once it will be selected, we will notify you.
2
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Contact us@940-1838-661
Email: info@mithilayatra.com
3
you can share our post and article on social media. spread more and more about MithilaYatra, so that more and more people will be the part of this project.
MithilaYatra Foundation
मिथिला'' प्राचीन भारत में एक राज्य था। माना जाता है कि यह वर्तमान उत्तरी बिहार और नेपाल की तराई का इलाका है जिसे मिथिला के नाम से जाना जाता था. मिथिला की लोकश्रुति कई सदियों से चली आ रही है जो अपनी बौद्धिक परंपरा के लिये भारत और भारत के बाहर जाना जाता रहा है। मिथिला की प्रमुख भाषा मैथिली है। धार्मिक ग्रंथों में सबसे पहले इसका उल्लेख रामायण में मिलता है। मिथिला का उल्लेख महाभारत, रामायण, पुराण तथा जैन एवं बौद्ध ग्रन्थों में हुआ है। मिथिला भारत का छोटा रूप रहने हुए भी आध्यात्मिक जगत में सिरमौर रहा है। मिथिला-मण्डल के विद्वानों में मण्डनमिश्र उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने शंकराचार्य से टक्कर ली थी जयदेव एवं विद्यापति मिथिला के प्रसिद्ध विभूति थे। मिथिलांचल आज अपनी विश्वप्रसिद्ध "मधुबनी पेंटिंग व मिथिला पेंटिंग " के लिया पुरे विश्व में जाना जाता है । मिथिलयात्रा फाउंडेशन के द्वारा २०१२ में मैथिलि साहित्य , संस्कृति व ऐतिहासिक धरोहर के संगरक्षण के तहत इस वेब लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है । हमारा उद्देश्य मिथिलांचल के गौरवशाली ऐतिहासिक परम्पराओ को जीवंत रखने का है ।